11. तुम्हारी आस जीवन की सांज
आज नहीं तो कल आओगी,
सोच यही -
तुम्हारी चाहत में जीये जा रहा हूँ
तुम्हारे आलिंगन के लिये हर गम -
को पीये जा रहा हूँ
स्वर्गसुख पाने की चाह नहीं,
केवल व केवल आपके लिये ही,
जीवन से लड़ाई लड़ता जा रहा हूँ
तुम्हारे आगमन पर, तुम्हे प्राप्त कर लूँगा,
तुम्हारे आँचल में खुद को छिपा लूँगा
किसी को न देखूँगा - किसी को न सोचूंगा,
चिता न चिंता की मुझे जलाएगी
तुम्हारी गोद में चैन से नींद आएगी
तुम्हारे आने की खुशी में -
होश मैं खो दूँगा
कुछ की आँखों मे अश्रु गम के -
कुछ की आँखों मे अश्रु खुशी के होंगे
समय कुछ बीतने पर, मैं स्वयं को -
ऊँचे काष्ठ मंच पर लेटा पाऊंगा,
अंगारों में लपटे उठने की देर है,
अपने को तुम्हारे हाथों में पाऊंगा,
हमेशा के लिये तुम्हारा हो जाऊँगा
द्वारा: राघव पुरोहित
आज नहीं तो कल आओगी,
सोच यही -
तुम्हारी चाहत में जीये जा रहा हूँ
तुम्हारे आलिंगन के लिये हर गम -
को पीये जा रहा हूँ
स्वर्गसुख पाने की चाह नहीं,
केवल व केवल आपके लिये ही,
जीवन से लड़ाई लड़ता जा रहा हूँ
तुम्हारे आगमन पर, तुम्हे प्राप्त कर लूँगा,
तुम्हारे आँचल में खुद को छिपा लूँगा
किसी को न देखूँगा - किसी को न सोचूंगा,
चिता न चिंता की मुझे जलाएगी
तुम्हारी गोद में चैन से नींद आएगी
तुम्हारे आने की खुशी में -
होश मैं खो दूँगा
कुछ की आँखों मे अश्रु गम के -
कुछ की आँखों मे अश्रु खुशी के होंगे
समय कुछ बीतने पर, मैं स्वयं को -
ऊँचे काष्ठ मंच पर लेटा पाऊंगा,
अंगारों में लपटे उठने की देर है,
अपने को तुम्हारे हाथों में पाऊंगा,
हमेशा के लिये तुम्हारा हो जाऊँगा
द्वारा: राघव पुरोहित
No comments:
Post a Comment