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Monday, July 14, 2014

तुम्हारी आस जीवन की सांज - To the End of Life

11. तुम्हारी आस जीवन की सांज

आज नहीं तो कल आओगी,
सोच यही -

तुम्हारी चाहत में जीये जा रहा हूँ
तुम्हारे आलिंगन के लिये हर गम -
को पीये जा रहा हूँ

स्वर्गसुख पाने की चाह नहीं,
केवल व केवल आपके लिये ही,
जीवन से लड़ाई लड़ता जा रहा हूँ

तुम्हारे आगमन पर, तुम्हे प्राप्त कर लूँगा,
तुम्हारे आँचल में खुद को छिपा लूँगा
किसी को न देखूँगा - किसी को न सोचूंगा,
चिता न चिंता की मुझे जलाएगी
तुम्हारी गोद में चैन से नींद आएगी

तुम्हारे आने की खुशी में -
होश मैं खो दूँगा
कुछ की आँखों मे अश्रु गम के -
कुछ की आँखों मे अश्रु खुशी के होंगे

समय कुछ बीतने पर, मैं स्वयं को -
ऊँचे काष्ठ मंच पर लेटा पाऊंगा,
अंगारों में लपटे उठने की देर है,
अपने को तुम्हारे हाथों में पाऊंगा,
हमेशा के लिये तुम्हारा हो जाऊँगा

द्वारा: राघव पुरोहित

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