9. 25 April 1997 - Netas (The Leaders)
नेता हो तुम, नेता हो,
हर किसी का वोट लेता हो
जिन्दा मक्खी निगल जाते हो,
चिकने घड़े बन जाते हो
चैन देश का लूट कर,
चैन की बंशी बजाते हो
आधे तीतर आधे बटेर हो,
अपनी-अपनी ढपली बजाते हो,
अपना-अपना राग गाते हो
अपना तो यही है, आखरी सपना,
तिजोरी को अपनी नोटों से भरना
न जाने किन-किन अन्जानों,
यह देश तो है, बेगानों का
आगे नाथ न पीछे पगहा,
देखा यही जगहा-जगहा
काम अब केवल यही करो,
गड़े मुर्दें उखाड़ते रहो
देश का दाहिना हाथ हो,
फिर भी आस्तीन का सांप हो
खाली नहीं बहुत भरा है,
कहता जाता जो शेष बचा है
लेकिन काम मेरा भी बहुत पड़ा है,
सो मैं, अब यही रुक गया
क्यों अन्धों के आगे रोना,
रोकर अपना दीदा खोना
द्वारा: राघव पुरोहित
नेता हो तुम, नेता हो,
हर किसी का वोट लेता हो
जिन्दा मक्खी निगल जाते हो,
चिकने घड़े बन जाते हो
चैन देश का लूट कर,
चैन की बंशी बजाते हो
आधे तीतर आधे बटेर हो,
अपनी-अपनी ढपली बजाते हो,
अपना-अपना राग गाते हो
अपना तो यही है, आखरी सपना,
तिजोरी को अपनी नोटों से भरना
न जाने किन-किन अन्जानों,
यह देश तो है, बेगानों का
आगे नाथ न पीछे पगहा,
देखा यही जगहा-जगहा
काम अब केवल यही करो,
गड़े मुर्दें उखाड़ते रहो
देश का दाहिना हाथ हो,
फिर भी आस्तीन का सांप हो
खाली नहीं बहुत भरा है,
कहता जाता जो शेष बचा है
लेकिन काम मेरा भी बहुत पड़ा है,
सो मैं, अब यही रुक गया
क्यों अन्धों के आगे रोना,
रोकर अपना दीदा खोना
द्वारा: राघव पुरोहित
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