10. 19 April 1996 जीवन
जो दीया था, दिख रहा दूर कही,
दिये जा रहा था, रोशनी
एकदम झोंका, हवा का आया,
लिये जा रहा था, रोशनी कहीं
केवल अब चिंगारी थी, वहाँ
अब केवल धुआँ था,
अब शान्ति-शान्ति और केवल शान्ति थी
द्वारा: राघव पुरोहित
जो दीया था, दिख रहा दूर कही,
दिये जा रहा था, रोशनी
एकदम झोंका, हवा का आया,
लिये जा रहा था, रोशनी कहीं
केवल अब चिंगारी थी, वहाँ
अब केवल धुआँ था,
अब शान्ति-शान्ति और केवल शान्ति थी
द्वारा: राघव पुरोहित
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