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Monday, July 14, 2014

The Death

7. मौत 26 August 1993

ये मौत भी अजीब है, दोस्त
जो चाहे उसे भी आए मौत,
जो न चाहे उसे भी आए मौत

चाहने पर तरसाये मौत,
न चाहने पर झट आ जाए मौत
ये मौत भी अजीब है, दोस्त

जो दु:खी हो जीवन से,
उसे न चैन से सुलाएँ मौत,
सुख को झट छीन ले जाएँ मौत

दोस्त नहीं है, मौत यारों,
दुश्मन नहीं है, मौत यारों

कौन जाने, क्या है? मौत!
हँसतो को रूला जाए मौत,

दुःख को और बढ़ा जाए मौत
मालूम नहीं कब आ जाए मौत,
कहीं अभी न आ जाए मौत!
ये मौत भी अजीब है, दोस्त

वो दौड़ी आ रही है, मौत,
किसका दरवाजा खटखटाएगी?
किसका चैन उड़ाएगी,
किसको खुश कर जायेगी,
जीवन में किसके उदासी छा जायेगी,

हर तरफ है, खौफ-खौफ
मौत है यह मौत-मौत

द्वारा: राघव पुरोहित

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