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Wednesday, September 9, 2015

अनकही सच्‍चाई

अनकही सच्‍चाई
मैनें जो कही
रही जो अनकही
अंतर काफी था
तुने क्‍या समझा
मैने क्‍यों न कहा
अंतर काफी था
दिल की दिवारों में
भुकंप सा लगना
मेरा कहना-तेरा समझना
अंतर काफी था
वह सच्‍चाई -
जो न कह पाया मैं
जो न सुन पाये तुम
अंतर काफी था
क्‍यों न कह पाया
क्‍यों न सुन पाया
अंतर काफी था
दिल के वश में
दिमाग बेमेल
अंतर काफी था
वहां दूर तेरा धधकना
यहां पास मेरा तड़फना
अंतर काफी था
कोशिश फिर करेंगे
कहने-सुनने की
कम हो अंतर, यह काफी है
तेरा - मेरे लिए
मेरा - तेरे लिए
यह समझ जाना
अंतर काफी था

राघव पुरोहित
10.09.2015