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Monday, July 14, 2014

The Thinking

16. The Thinking

क्‍यों कुछ सज्‍जन - दुर्जनता दिखाते है
क्‍यों सामने वाले को नीचा दिखाते हैं
क्‍यों चुप है सामने वाला
वो समझ नहीं पाते हैं
 

गुलाब के साथ काटे भी हो सकते हैं
क्‍यों वो समझ नहीं पाते हैं
 

क्‍यों कुछ दुर्जन - राक्षस हो जाते हैं
खुद के लिए दूसरों को खा जाते हैं
क्‍यों चुप है सामने वाला
वो समझ नहीं पाते हैं
 

कोई गले में हड्डी भी हो सकता है
क्‍यों वो समझ नहीं पाते हैं
 

क्‍यों कुछ पढेलिखे - पागल हो जाते हैं
क्‍यों कलम से चाकू चलाते हैं
क्‍यों चुप है सामने वाला
वो समझ नहीं पाते हैं


कलम किसीकी तलवार भी हो सकती हैक्‍यों वो समझ नहीं पाते हैं 

राघव पुरोहित 

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