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Monday, July 14, 2014

मुक्‍ति The Freedom

मुक्‍ति The Freedom

तुमने प्‍यार को मेरे
आंचल में छुपा लिया
यादों को मेरी तुमने
सपनों में सुला दिया

ये बेरूख ऑखें
दास्‍ताने दासता बया करती है
पास होकर भी
दूरियों का जहॉं बया करती है

जाअों! उड़ जाओं
बेमेल हैं यहॉं
मिले नया जहॉं

बंधन बांधना, बंधन छाटना
यादों में झाकना, यादों को पाटना
भुला देना, भ्‍ाुल जाना
आसां नहीं

गगन मुक्‍त है
मुक्‍त सब पंछी तारे
जाओं। उड़ जाओं
यही अंतिम घटा रे!


राघव पुराेहित
15.07.2014

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