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Monday, July 14, 2014

Desire

15.  मुराद
जैसे मन की मुराद
हो गई हो पूरी
पत्तियां गुलाब की
हो गई है गीली
खुशबु है फैली
बागे जहां में
चलो थोड़ा धुम आये
ठंड है इतनी
मन घबराये
 

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