Search This Blog

Thursday, July 17, 2014

दुरियॉं The Distance

दुरियॉं The Distance

मेरी नजरों से, इतना न गिरों
कि उठाना मुश्किल हो जाये

मेरे सामने से तुम निकलों
और नजरे मिलाना मुश्किल हो जाये

मेरे जजबात, माना, पढना है मुश्किल
थोड़ा दिल मिला कर देखों
रास्‍ता आसान हो जाए

बेवफा बताने से पहले
सनम वफा तो जानी होती
दूर जाने से पहले
हकीकत तो पहचानी होती

जब घाव दिल का दिया हो
परायों को क्‍या कहे? अपने ही रूठ जाते है!
दुरियॉं दिलों की, कब्र है ए-जालिम
जिन्‍दों की क्‍या कहे, मुर्दों का दिल जला दें

हमसे शिकवा करते हो
हमारी शिकायत नहीं सुनते
यो दिल की दुरियॉं नहीं मिटाई जाती

परायों में बैठ कर
हमें और पराया पाओगे
दुरियॉं मिटाने की जगह
दुरियॉं और पाओगे

चार दिवारों से
दुनिया नहीं देखी जा सकती!
चार दिवारों से
दुनिया नहीं देखी जा सकती!

राघव पुरोहित

Monday, July 14, 2014

मुक्‍ति The Freedom

मुक्‍ति The Freedom

तुमने प्‍यार को मेरे
आंचल में छुपा लिया
यादों को मेरी तुमने
सपनों में सुला दिया

ये बेरूख ऑखें
दास्‍ताने दासता बया करती है
पास होकर भी
दूरियों का जहॉं बया करती है

जाअों! उड़ जाओं
बेमेल हैं यहॉं
मिले नया जहॉं

बंधन बांधना, बंधन छाटना
यादों में झाकना, यादों को पाटना
भुला देना, भ्‍ाुल जाना
आसां नहीं

गगन मुक्‍त है
मुक्‍त सब पंछी तारे
जाओं। उड़ जाओं
यही अंतिम घटा रे!


राघव पुराेहित
15.07.2014

Satisfaction

 17.  संतुष्टि
उससे मेरी -
कल मुलाकात हुई,
ज्यादा नहीं ।
एक-दो बात हुई।

जो चाहा मैंने।
हॉ! मैंने दिया।

मैंने रोशनी चाही,
हॉ! मैंने दी।
कुछ पल की!

मैंने चांदनी चाही,
हॉ! मैंने दी।
कुछ पल की!

मैंने रागनी चाही,
हॉ! मैंने दी।
कुछ पल की!

मैंने दोस्ती! चाही,
हॉ! मैंने दी।
कुछ पल की!

मैंने दुश्मीनी कब चाही?
हॉ! मैंने मुफ्त दी।

मैंने शांति चाही,
हॉ! मैंने दी।
कुछ पल की!

मैंने अशांति कब चाही?
हॉ! तेरा बोनस।

मैंने संतुष्टि चाही,
क्यों…! मुझे देने में नहीं -
तुझे लेने में नहीं।

चल छोड़ - कुछ और मांग
लेकिन अब बंद है जुबान।
चिरशांति ! मिली, बिना मांग।।


राघव पुरोहित
 

The Thinking

16. The Thinking

क्‍यों कुछ सज्‍जन - दुर्जनता दिखाते है
क्‍यों सामने वाले को नीचा दिखाते हैं
क्‍यों चुप है सामने वाला
वो समझ नहीं पाते हैं
 

गुलाब के साथ काटे भी हो सकते हैं
क्‍यों वो समझ नहीं पाते हैं
 

क्‍यों कुछ दुर्जन - राक्षस हो जाते हैं
खुद के लिए दूसरों को खा जाते हैं
क्‍यों चुप है सामने वाला
वो समझ नहीं पाते हैं
 

कोई गले में हड्डी भी हो सकता है
क्‍यों वो समझ नहीं पाते हैं
 

क्‍यों कुछ पढेलिखे - पागल हो जाते हैं
क्‍यों कलम से चाकू चलाते हैं
क्‍यों चुप है सामने वाला
वो समझ नहीं पाते हैं


कलम किसीकी तलवार भी हो सकती हैक्‍यों वो समझ नहीं पाते हैं 

राघव पुरोहित 

Desire

15.  मुराद
जैसे मन की मुराद
हो गई हो पूरी
पत्तियां गुलाब की
हो गई है गीली
खुशबु है फैली
बागे जहां में
चलो थोड़ा धुम आये
ठंड है इतनी
मन घबराये
 

Chalte Chalte 4

14. 

दिल का घबराना
यू ही तो नहीं है
उनका मुस्‍कराना
यू ही तो नहीं है
बादलों का बरसना
यू ही तो नहीं है
मेरा
पानी के लिए तरसना
यू ही तो नहीं है 

The Book

13.  किताब
दिल की किताब के कोने में
लिखा है - इक अक्षर
कहे जाने को - अगले पन्‍ने पर 
होता है - ऐसा ही अक्‍सर
बुझों तो जाने-
अरे भोई वो पेज नम्‍बर है।


चार शब्‍द - Only four words

12.  चार शब्‍द
कहने के लिये
उसके पास चार शब्द थे
कहने के लिए
मेरे पास दर्द भर था
मिले  भी
हम  किसी मोड़ पर
ना  वो कुछ कह पाए
ना हम कुछ कह पाए
आँखों ने आँखों
को क्या कहा
हम वो भी नहीं समझ पाए

Raghav Purohit
03-02-2012

तुम्हारी आस जीवन की सांज - To the End of Life

11. तुम्हारी आस जीवन की सांज

आज नहीं तो कल आओगी,
सोच यही -

तुम्हारी चाहत में जीये जा रहा हूँ
तुम्हारे आलिंगन के लिये हर गम -
को पीये जा रहा हूँ

स्वर्गसुख पाने की चाह नहीं,
केवल व केवल आपके लिये ही,
जीवन से लड़ाई लड़ता जा रहा हूँ

तुम्हारे आगमन पर, तुम्हे प्राप्त कर लूँगा,
तुम्हारे आँचल में खुद को छिपा लूँगा
किसी को न देखूँगा - किसी को न सोचूंगा,
चिता न चिंता की मुझे जलाएगी
तुम्हारी गोद में चैन से नींद आएगी

तुम्हारे आने की खुशी में -
होश मैं खो दूँगा
कुछ की आँखों मे अश्रु गम के -
कुछ की आँखों मे अश्रु खुशी के होंगे

समय कुछ बीतने पर, मैं स्वयं को -
ऊँचे काष्ठ मंच पर लेटा पाऊंगा,
अंगारों में लपटे उठने की देर है,
अपने को तुम्हारे हाथों में पाऊंगा,
हमेशा के लिये तुम्हारा हो जाऊँगा

द्वारा: राघव पुरोहित

Life

10. 19 April 1996  जीवन

जो दीया था, दिख रहा दूर कही,
दिये जा रहा था, रोशनी
एकदम झोंका, हवा का आया,
लिये जा रहा था, रोशनी कहीं
केवल अब चिंगारी थी, वहाँ
अब केवल धुआँ था,
अब शान्ति-शान्ति और केवल शान्ति थी

द्वारा: राघव पुरोहित

Netaji - The Leaders

9. 25 April 1997 - Netas (The Leaders)

नेता हो तुम, नेता हो,
हर किसी का वोट लेता हो

जिन्दा मक्खी निगल जाते हो,
चिकने घड़े बन जाते हो

चैन देश का लूट कर,
चैन की बंशी बजाते हो

आधे तीतर आधे बटेर हो,
अपनी-अपनी ढपली बजाते हो,
अपना-अपना राग गाते हो

अपना तो यही है, आखरी सपना,
तिजोरी को अपनी नोटों से भरना

न जाने किन-किन अन्जानों,
यह देश तो है, बेगानों का

आगे नाथ न पीछे पगहा,
देखा यही जगहा-जगहा

काम अब केवल यही करो,
गड़े मुर्दें उखाड़ते रहो

देश का दाहिना हाथ हो,
फिर भी आस्तीन का सांप हो

खाली नहीं बहुत भरा है,
कहता जाता जो शेष बचा है

लेकिन काम मेरा भी बहुत पड़ा है,
सो मैं, अब यही रुक गया

क्यों अन्धों के आगे रोना,
रोकर अपना दीदा खोना

द्वारा: राघव पुरोहित

Enemy

8. 1 November, 1997 - Dushan

आज मैं, बेचारा हूँ
बिना चारे के फिरता मारा-मारा हूँ

एक नहीं, दो, नहीं, लाखों हैं, दुश्मन मेरे
जग मे ही नहीं, घर में भी है ठहरे

अपनों के मन में कलुषता घर कर गई,
सदभावना, भाई-चारे का क़त्ल कर गई
फैलाया है जहर, इसने हैवानियत का
पीया है लहू, इसने इंसानियत का

हर इंसान आज घुट-घुट कर मरता जा रहा
साम्राज्य पाप का, चारों तरफ फैलता जा रहा
मेरे मारने से क्या ये मरेंगे?
एक को मारूंगा, सौ सिर पर पड़ेंगे

इनके ही कई है - बहन - भाई और भौजाई,
हर जगह जिन्होंने अपनी जड़े फैलाई
भ्रष्टाचार की लुगाई है, बईमानी

डाल हाथों मे हाथ, साथ-साथ चलते है जानी
इसकी बहन रिश्वत को भी कम न समझो भाई!
हर किसी ऐरे-गेरे की जीभ पर समाई

अपने को अगर इनके शिकंजे से बचाना,
तब सब मिलकर एक हो जाना,
तब सब मिलकर एक हो जाना,
बस केवल मिलकर, एक हो जाना

द्वारा: राघव पुरोहित

The Death

7. मौत 26 August 1993

ये मौत भी अजीब है, दोस्त
जो चाहे उसे भी आए मौत,
जो न चाहे उसे भी आए मौत

चाहने पर तरसाये मौत,
न चाहने पर झट आ जाए मौत
ये मौत भी अजीब है, दोस्त

जो दु:खी हो जीवन से,
उसे न चैन से सुलाएँ मौत,
सुख को झट छीन ले जाएँ मौत

दोस्त नहीं है, मौत यारों,
दुश्मन नहीं है, मौत यारों

कौन जाने, क्या है? मौत!
हँसतो को रूला जाए मौत,

दुःख को और बढ़ा जाए मौत
मालूम नहीं कब आ जाए मौत,
कहीं अभी न आ जाए मौत!
ये मौत भी अजीब है, दोस्त

वो दौड़ी आ रही है, मौत,
किसका दरवाजा खटखटाएगी?
किसका चैन उड़ाएगी,
किसको खुश कर जायेगी,
जीवन में किसके उदासी छा जायेगी,

हर तरफ है, खौफ-खौफ
मौत है यह मौत-मौत

द्वारा: राघव पुरोहित

Chalte Chalte 2

6.
आज शाम चाहे हसीं लग रही हो,
खुशनसीब नहीं हो सकती,

आप आज चाहे नमी आँखों में रखते हो,
पर यह दिल कि खुशी नहीं हो सकती

तडफ दिल की, आँखे छुपा न पा रही,
भीगी हुई पलकें हर राज बता रही

आप किसी की यादों में खोये से है,
अपने को आसुओं के समंदर में डुबोये से है

हमें आपके गम की मरहम का ध्यान नहीं,
अगर आप बता दें, कोई नुकसान नहीं

द्वारा: राघव पुरोहित

The Life Line

5. जीवन तरंग

काहे को तुम गिडगिडा रहे,
पत्थर के सामने सिर फुडा रहे

जहर है जिंदगी, फिर भी पी लों,
जीना है चार दिन मजे मे जी लों

अजब है तुम्हरी अन्धभक्ति,
गजब है तुम्हरी सहनशक्ति

काहे को अपना गला दु:खा रहे,
जो है नहीं, उसको बुला रहें

बीते है बरस और बीतेंगे,
होगा वही जो करम जीतेंगे

मरुधर है जीवन, जल को भटको,
मिला थोड़ा सा धीरज धर लो

शांत नहीं होंगे ये कष्ट,
जीवन को न कर लेना भ्रष्ट

पाया है, उसमें शांत रहों,
जीवन है, जीना जीते रहों

द्वारा: राघव पुरोहित

Kisaan - The Farmer

4. Kisaan - The Farmer

Oh Lo! Him,
He is a, tired, ryot,
With the two flushy oxen.
From where, they are coming?
In so poor and happy condition.
Passably, they are coming-
From the place of devotion.
With the great proud.
A lamp hung on a long pole -
Is spreading dim light.
Oh! Why-why? I am forgetting,
Where is destination?
Where he is going?
Slogging up with speed.
Possibly, they are going-
To the place of rest.
Feeling of great satisfaction.
A lady, standing at the door,
Waiting and spreading sweet smile.

By:  Raghav Purohit

Oh! Voyagers

Oh! Voyagers

The every little moment,
Can go and catch the stars.
The every little lane,
Can grow and meet the roads.
Man, in a very short span,
With all goods or evil ways,
Can grow and gain the way.
And forgets all affairs, but -
Not to aim.
The last moment, can recall you,
All misdeeds, which never be thought.
Till last moment, you fight with world,
But He decreases your power,
Your elements are destroyed.
Your last voyage being
You are freezed and...
You leave you.
You are forgotten after some time.

If you were good -
You are stone now,
Life will be read-
And forgotten by the travellers.

If you were bad -
You are ash now,
Can be trampled by travellers.

If you, looking from heaven,
Ne'er want to have talk with us,
Ne'er try to stop our misdeeds.
You will our guide, to follow your way.

If you, looking from hell,
E'er want to talk us
E'er try to preach us for misdeeds,
You will always appear in the anecdotes

As an evil - teach us,
Not to do all, which had been done.
You, also, our escort.


Oh! Voyagers,
We all tribute you.

By: Raghav Purohit

Chalte Chalte 1

2- बस ऐसे ही -

बिन पैसे के राजा भी मोहताज हो जाता है,
पैसा हो तो, भिखमंगा भी सरताज हो जाता है

द्वारा: राघव पुरोहित

बरफाना रूप लिए, बरसाती फुहार आई,
दीवाना रूप लिए, दिल कि बहार आई
द्वारा: राघव पुरोहित

तारों सी टिमटिमाओं , सितारों सी जगमगाओं
हे! चांदनी, रातो में न छिप जाओं
द्वारा: राघव पुरोहित

ये हुस्न कि दिवार है,
दुधारी तलवार है
बचना ही मुश्किल नहीं,
चलना भी खतरनाक है

द्वारा: राघव पुरोहित

Message from Earth

1- सबसे पहले २५ मई १९९७

धरती माता का पैगाम

मेरे अन्तर्मन का द्वंद् -
आओ, तुम्हे सुनाती हूँ

अहिंसा की पुजारिन हूँ,
हिंसा पर न ऊतर आऊ,
इतना न मुझको उकसाओं

तुम जानते हो -
कहने की भी सीमा होती,
सहने की भी सीमा होती

मैं न अपनी शक्ति खो दूँ,
इतना न मुझको दुत्कारों
आसूँ नहीं मैं, लहू पी रही,
जी कर भी मैं, नहीं जी रही

तुम सब मुझको रौंद रहे हो,
जगह-जगह से खोद रहे हो
घावों में मेरे पीब भरी,
खुदको फिर भी संभालें खड़ी

इसलिए तुमको कहती जाती,
जगह-जगह समझाती जाती
समझ सको तो समझ जाओं ,
ये अकाल, बाढ़, तूफान क्यों?
ये धरती ही शैतान क्यों?

अपने को न संभाल पा रही,
घुट-घुट कर मरती जा रही

न अपनी कब्र, अपने हाथों खोदों,
कुछ बीज जीवन के बो दो
इसी में तुम्हारी जीत बसी है,
ज्योत जीवन की यही बची है

मेरे बेटों ये पैगाम आखरी,
मेरे बेटों ये पैगाम आखरी

द्वारा: राघव पुरोहित