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Sunday, January 11, 2015

शीर्षक - माटी गान साजे विधी विधान (बेसुरा)

शीर्षक - माटी गान साजे विधी विधान (बेसुरा)

हे मेरे चमन
कहाँ है करम (मस्तक/कर्तव्य)
हरा भरा
कई फूलों और पेड़ो से भरा
फिर भी
उजड़ा उजड़ा, क्यों बंजर पड़ा
कहाँ है? वो राजा!
कहाँ है? वो रंक
बजा सके जो करम का शंख
चुप क्यों कुछ मंत्री बैठे
कुछ क्यों अपनी रोटियाँ सेके
कहाँ है वो बेटे
जो स्वम की नहीं
सोचे तेरी।
धरा को कर दे अमृत
दिल नरम
कहाँ है करम
हाथ उधर
पाँव इधर
दिशा भ्रम
या
मति भ्रम
क्यों? केवल
अपने
शिख्वा और गिले
तेरे लिए
कोई न मिले
लूट ले गए दूजे
हम बैठे गए रूखे
साहस और अभिमान कहा
करम से सही ज्ञान कहा
दम्भ दम्भ केवल दम्भ
ये क्या! कर गए हम

नोट- कहानी बाकी है

राघव पुरोहित
09.01.2015

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